IndiGo के हालिया संकट के बीच स्पाइसजेट तेज़ी से मार्केट शेयर और निवेशकों का ध्यान खींचती दिख रही है, क्योंकि IndiGo ने मौजूदा डिमांड को कैश करने के लिए अपनी उड़ानें और फ्लीट दोनों बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन और ऑपरेशन में गड़बड़ी के कारण जहां यात्रियों को परेशानी हुई, वहीं स्पाइसजेट ने तेजी से नए रूट और अतिरिक्त फ्लाइट्स जोड़कर खुद को मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया है।
IndiGo संकट और डिमांड में बदलाव
पिछले कुछ दिनों से IndiGo बड़ी संख्या में फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी की समस्या से जूझ रही है, जिसके कारण कई एयरपोर्ट पर यात्रियों को भारी दिक्कतें हुईं और कंपनी के शेयर में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिसंबर 2025 की शुरुआत से IndiGo के ऑपरेशंस में आए इस संकट के चलते इसका शेयर करीब 18–22 प्रतिशत तक टूट चुका है और हजारों करोड़ रुपये का मार्केट कैप मिट गया है। ऐसे माहौल में यात्रियों और निवेशकों, दोनों की नजर दूसरे लो-कॉस्ट कैरियर्स पर गई, जिनमें स्पाइसजेट सबसे आगे दिख रही है
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स्पाइसजेट की उड़ानें और फ्लीट एक्सपेंशन
स्पाइसजेट ने विंटर शेड्यूल के लिए रोजाना लगभग 100 अतिरिक्त उड़ानें जोड़ने की योजना की घोषणा की है, जिससे व्यस्त रूट्स पर इसकी सीट क्षमता में अच्छा इजाफा होगा। कंपनी पहले ही अपने बेड़े में दो नए बोइंग 737 एयरक्राफ्ट जोड़ चुकी है, जिनका संचालन अब शुरू हो चुका है, और लक्ष्य है कि 2025 के अंत तक ऑपरेशनल फ्लीट को लगभग दोगुना तथा Available Seat Kilometres (ASKM) को लगभग तीन गुना तक बढ़ाया जाए। प्रबंधन का कहना है कि आने वाले महीनों में आठ तक ग्राउंडेड बोइंग विमानों को दोबारा सेवा में लाया जाएगा, जिससे नेटवर्क कवरेज और मजबूत हो सके।
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IndiGo शेयर प्राइस में हाल की तेजी
IndiGo संकट के बीच पिछले कुछ सेशंस में स्पाइसजेट के शेयरों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है और स्टॉक ने 3–4 ट्रेडिंग सेशंस में मिलाकर लगभग 15–17 प्रतिशत तक की रैली दिखाई है। खबरों के अनुसार बीएसई पर शेयर ने हाल ही में इंट्रा-डे में लगभग 35–36 रुपये के स्तर को छुआ और दिन के आखिर में भी करीब 5–6 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि कुछ दिन पहले तक यह करीब 31–32 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा था। यह उछाल साफ दिखाता है कि मार्केट स्पाइसजेट की क्षमता बढ़ाने और इंडिगो की कमजोरी का फायदा उठाने वाली रणनीति को पॉजिटिव तरीके से रिएक्ट कर रहा है
ऑपरेशनल प्रदर्शन और वित्तीय स्थिति
ताज़ा तिमाही नतीजों के मुताबिक स्पाइसजेट अभी भी नेट लॉस में है और Q2 FY26 में कंपनी को लगभग 600 करोड़ रुपये से ज़्यादा का घाटा दर्ज करना पड़ा, हालांकि यात्री लोड फैक्टर यानी Passenger Load Factor करीब 84.3 प्रतिशत पर मजबूत बना हुआ है। ऑपरेशंस से रेवेन्यू लगभग 792 करोड़ रुपये के आसपास रहा, जो साल-दर-साल लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट दिखाता है, लेकिन PAX RASK (Revenue per Available Seat Kilometre) 3.91 रुपये से बढ़कर करीब 4.04 रुपये तक पहुंचा है, जो प्रति सीट कमाई में सुधार का संकेत देता है। कंपनी के सामने अभी भी ग्राउंडेड फ्लीट की कॉस्ट, फ्यूल प्राइस और एयरस्पेस रिस्ट्रिक्शन जैसी चुनौतियां हैं, फिर भी मजबूत लोड फैक्टर और बढ़ती उड़ानों के जरिए स्पाइसजेट निकट अवधि में बेहतर उपयोगिता और रेवेन्यू ग्रोथ पर फोकस कर रही है।
Disclaimer : शेयर बाजार में निवेश जोखिम के साथ होता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें। हम जानकारी की पूर्णता या सटीकता की गारंटी नहीं देते।






