Defense sector : भारत सरकार की डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल (DAC) आने वाली बैठक में लगभग 80,000 करोड़ रुपये के स्वदेशी रक्षा प्रोजेक्ट्स पर फैसला ले सकती है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इन प्रस्तावों से थलसेना, वायुसेना और नौसेना की ताकत के साथ‑साथ देश की आत्मनिर्भरता भी और मजबूत होने की तैयारी है।
80,000 करोड़ की डिफेंस डील क्या है
रिपोर्ट्स के अनुसार DAC की अगली बैठक में करीब 80,000 करोड़ रुपये के कई बड़े रक्षा खरीद प्रस्तावों पर चर्चा और मंजूरी की संभावना है। इन प्रस्तावों में टैंक मॉडर्नाइजेशन, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और आर्टिलरी से जुड़ी अलग‑अलग कैटेगरी के प्रोजेक्ट शामिल किए गए हैं। यह पूरी खरीद मुख्य रूप से “मेक इन इंडिया” मॉडल के तहत घरेलू कंपनियों से होने का अनुमान है, ताकि इंपोर्ट पर निर्भरता घटे।
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DAC मीटिंग और समयसीमा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 26 दिसंबर 2025 की DAC मीटिंग में सभी प्रस्तावों पर फैसला नहीं हो सका और अब इन्हें लगभग 15 जनवरी 2026 तक टाल दिया गया है। इस दौरान इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट की व्यवस्था को भी बढ़ाया गया है, जिसमें तीनों सेनाओं के वाइस चीफ को 300 करोड़ रुपये तक की त्वरित खरीद की अनुमति है। सरकार का लक्ष्य है कि DAC से स्वीकृति मिलने के बाद दो साल के भीतर कॉन्ट्रैक्ट साइन की प्रक्रिया पूरी हो जाए, ताकि प्रोजेक्ट समय पर जमीन पर उतर सकें।
किन हथियारों और सिस्टम पर फोकस
सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित 80,000 करोड़ के पैकेज में लगभग 200 T‑90 टैंकों के अपग्रेड, इंडिजिनस इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम, मध्यम दूरी की सतह‑से‑हवा मिसाइलें (MR‑SAM) और पिनाका रॉकेट सिस्टम के उन्नत वर्जन शामिल हैं। इसके साथ ही Astra Mark‑2 जैसी लॉन्ग‑रेंज एयर‑टू‑एयर मिसाइल, लूटिरिंग म्यूनिशन (कमीकाज़ी ड्रोन) और निगरानी ड्रोन की बड़ी संख्या में खरीद पर भी विचार हो रहा है। इन सबका लक्ष्य है कि जमीनी, हवाई और समुद्री मोर्चे पर भारत की मारक क्षमता और निगरानी क्षमता दोनों कई गुना बढ़ाई जा सके।
मेक इन इंडिया और इंडस्ट्री पर असर
रक्षा सचिव के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में कुल रक्षा पूंजीगत खर्च का लगभग 89% हिस्सा घरेलू खरीद पर किया गया, जबकि इंटरनल टारगेट 75% रखा गया था। 2025–26 के लिए कुल रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये के आसपास है, जिसमें लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए तय किए गए हैं, ऐसे में 80,000 करोड़ की संभावित डील इस पूंजीगत खर्च का बड़ा हिस्सा बन सकती है। इससे सरकारी DPSU के साथ‑साथ प्राइवेट डिफेंस कंपनियों, MSME और स्टार्टअप सेक्टर में भी नए ऑर्डर, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
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