सरकार के ₹44,700,000,000 करोड़ के निवेश से Defense के इन 3 शेयरों में बड़ी तेजी पक्की! जाने इन शेयरों के नाम…

सरकार की ₹44,700 करोड़ की नई योजना से मझगांव डॉक, गार्डन रीच और कोचिन शिपयार्ड जैसे Defense शिपबिल्डर्स के लिए लंबे समय तक ग्रोथ और ऑर्डर की संभावनाएं और मजबूत होती दिख रही हैं। इन कंपनियों के पास पहले से ही हजारों करोड़ की ऑर्डर बुक और रक्षा के साथ हरित जहाजों (ग्रीन वेसल्स) में बड़े प्रोजेक्ट्स की पाइपलाइन मौजूद है।

सरकार की ₹44,700 करोड़ की योजना क्या है

केंद्र सरकार ने दो नई स्कीमें शुरू की हैं – Shipbuilding Financial Assistance Scheme (SBFAS) और Shipbuilding Development Scheme (SbDS), जिनकी कुल वैल्यू लगभग ₹44,700 करोड़ रखी गई है। SBFAS के तहत हर जहाज पर कैटेगरी के हिसाब से 15–25% तक वित्तीय सहायता दी जाएगी और कुल बजट करीब ₹24,736 करोड़ है, जिससे लगभग ₹96,000 करोड़ तक के शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट मिलने का अनुमान है। SbDS का बजट करीब ₹19,989 करोड़ है, जो ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर, नए शिपयार्ड और पुराने शिपयार्ड की मॉडर्नाइजेशन पर खर्च होगा, और ये स्कीमें FY36 तक लागू रहेंगी।

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Mazagon Dock Shipbuilders पर प्रभाव

Mazagon Dock Shipbuilders भारत का सबसे बड़ा डिफेंस शिपयार्ड है, जो डेस्ट्रॉयर, स्टेल्थ फ्रिगेट और पनडुब्बी जैसे कॉम्प्लेक्स वॉरशिप बनाता है और इंडियन नेवी का प्रमुख पार्टनर माना जाता है। सितंबर 2025 तक कंपनी की ऑर्डर बुक लगभग ₹27,415 करोड़ रही, जो करीब 3 साल की रेवेन्यू विजिबिलिटी देती है और कंपनी लगभग ₹3 लाख करोड़ से ज्यादा के नए डिफेंस प्रोजेक्ट्स पर बोली लगा रही है। नए शिपबिल्डिंग पैकेज से ड्राई डॉक, ऑटोमेशन और बड़े जहाज बनाने की कैपेसिटी बढ़ाने के लिए कैपेक्स को सीधी मदद मिल सकती है, जिससे दीर्घावधि में रेवेन्यू और मार्जिन दोनों पर पॉजिटिव असर माना जा रहा है।

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Garden Reach Shipbuilders & Engineers पर फोकस

Garden Reach Shipbuilders & Engineers एक मल्टी‑प्रोडक्ट डिफेंस शिपयार्ड है, जो फ्रिगेट, कोर्वेट, पैट्रोल वेसल्स के साथ‑साथ रिपेयर, इंजन असेंबली और इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स भी बनाता है। सितंबर 2025 तक GRSE की ऑर्डर बुक करीब ₹20,205 करोड़ थी, जो 4 साल से ज्यादा की रेवेन्यू विजिबिलिटी देती है और कंपनी यूरोप सहित इंटरनेशनल मार्केट में भी एक्सपोर्ट ऑर्डर बढ़ा रही है। GRSE ऑटोनॉमस शिप, इलेक्ट्रिक फेरी और हाइड्रोजन फ्यूल‑सेल वेसल जैसे नेक्स्ट‑जेनरेशन प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है, जिससे सरकार की ग्रीन शिपिंग पॉलिसी और नई स्कीमों से इसे सीधे लाभ की संभावनाएं दिखती हैं।

Cochin Shipyard की मजबूत स्थिति

Cochin Shipyard डिफेंस और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में काम करता है और INS Vikrant जैसी बड़ी एयरक्राफ्ट कैरियर शिप बनाने के लिए जाना जाता है। FY25 के अंत में कंपनी की ऑर्डर बुक लगभग ₹21,100 करोड़ रही, जो 4–5 साल की विजिबिलिटी देती है और इसके अलावा करीब ₹2.2 लाख करोड़ से ज्यादा की डिफेंस पाइपलाइन पर कंपनी नज़र रखे हुए है। कोचिन शिपयार्ड हाइब्रिड‑इलेक्ट्रिक, जीरो‑इमिशन और हाइड्रोजन‑पावर्ड शिप्स के क्षेत्र में अग्रणी है, और हाल में करीब ₹3,300 करोड़ का कैपेक्स पूरा कर चुकी है, जिससे नई सरकारी स्कीम के तहत कैपेसिटी यूटिलाइजेशन बढ़ने पर रेवेन्यू तेज़ी से स्केल‑अप होने की संभावना बनती है।

Disclaimer : शेयर बाजार में निवेश जोखिम के साथ होता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें। हम जानकारी की पूर्णता या सटीकता की गारंटी नहीं देते।

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