भारत की Green energy इंडस्ट्री तेज़ी से बढ़ रही है और इसी रफ़्तार को पकड़ने के लिए कंपनी आने वाले समय में बड़ा कैपेक्स प्लान लेकर चल रही है। यह कंपनी सोलर पैनल, सेल, बैटरी, इनवर्टर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली एक इंटीग्रेटेड रिन्यूेबल एनर्जी प्लेयर है, जो पूरे भारत में रेसिडेंशियल, कमर्शियल और ग्रामीण बाज़ारों को सर्विस देती है
Fujiyama Power Systems का बिज़नेस मॉडल
Fujiyama Power Systems भारत के Other Electrical Equipment सेक्टर में काम करती है, जिसका साइज फिलहाल लगभग 50 बिलियन डॉलर के आसपास है और 2025 से 2029 के बीच यह मार्केट करीब 15.6% की CAGR से बढ़ने का अनुमान है। कंपनी के पास 500 से ज्यादा प्रोडक्ट वेरिएंट हैं और यह 23 राज्यों में 790 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर्स और 5,900 से ज्यादा डीलर्स के नेटवर्क के ज़रिए एक मिलियन से अधिक एंड कस्टमर्स तक पहुंच रखती है।
हालिया फाइनेंशियल प्रदर्शन और शेयर प्राइस
Fujiyama Power Systems ने H1 FY26 में 11,652 मिलियन रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया, जिसमें सबसे बड़ा योगदान सोलर पैनल से 5,290 मिलियन रुपये (लगभग 45%) का रहा, जबकि बैटरी से 2,374 मिलियन रुपये और इलेक्ट्रॉनिक्स से करीब 3,300 मिलियन रुपये की आय हुई। वॉल्यूम के हिसाब से इलेक्ट्रॉनिक्स 640 MW के साथ सबसे आगे रही, इसके बाद बैटरी 481 MW और पैनल 302 MW पर रहे, जो पैनल से बेहतर रियलाइजेशन को दिखाता है। शेयर अभी करीब 201 रुपये के आसपास ट्रेड हो रहा है और कंपनी का मार्केट कैप लगभग 6,145 करोड़ रुपये है।
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कैपेक्स प्लान और क्षमता विस्तार
Fujiyama Power Systems FY26 तक 600 करोड़ रुपये से अधिक का कैपेक्स लगाने की तैयारी में है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा नए सोलर सेल और बैटरी प्लांट्स पर खर्च होना है। दादरी प्लांट में 1 GW सोलर सेल लाइन की ट्रायल रन शुरू हो चुकी है, जिस पर 350–400 करोड़ रुपये के आसपास का निवेश अनुमानित है, जबकि नई बैटरी लाइन को मार्च 2026 तक कमीशन करने का लक्ष्य है। रतलाम यूनिट में आईपीओ से मिले फंड के ज़रिए 2,000–2,000 MW की पैनल, इनवर्टर और बैटरी क्षमता जोड़ने के लिए करीब 272 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है, जिससे FY26 के अंत तक कुल प्रोडक्शन क्षमता लगभग दोगुनी हो सकती है
इंडस्ट्री आउटलुक और डिमांड ड्राइवर्स
रूफटॉप सोलर सेगमेंट 40–43% की तेज़ CAGR से बढ़ रहा है, जिससे कंपनी के B2C फोकस वाले मॉडल को सीधा फायदा मिल रहा है। मैनेजमेंट का मानना है कि मॉड्यूल ओवरसप्लाई का रिस्क फिलहाल सीमित है क्योंकि बड़ी हिस्सेदारी इन-हाउस B2C डिमांड में ही खप जाती है, जिससे B2B पर निर्भरता कम हो जाती है। DCR सेल की उपलब्धता भी पहले के मुकाबले सुधरी है, जिससे सब्सिडी आधारित ऑन-ग्रिड स्कीमों के तहत बेहतर एक्ज़ीक्यूशन और टियर–1 शहरों में तेजी से एक्सपैंशन की संभावना बढ़ी है।
लिस्टिंग हिस्ट्री और शेयरहोल्डिंग पर संकेत
Fujiyama Power Systems का 828 करोड़ रुपये का IPO 216–228 रुपये के प्राइस बैंड में आया था और BSE पर शेयर 220 रुपये पर लिस्ट हुआ, जिससे निवेशकों को करीब 3.5% का लिस्टिंग लॉस देखने को मिला। म्यूट लिस्टिंग के बावजूद मैनेजमेंट लंबी अवधि के रिन्यूएबल एनर्जी फोकस, क्षमता विस्तार और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को आगे की ग्रोथ के प्रमुख ड्राइवर मानता है।
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