Union Budget 2026 को लेकर अनुमान है कि सरकार Semiconductor सेक्टर के लिए इंसेंटिव स्कीम जारी रखने, टैक्स में राहत और वैल्यू ऐडिशन पर फोकस जैसे बड़े ऐलान कर सकती है, जिससे इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों और उनके शेयरों में गतिविधि बढ़ने की संभावना है। इंडस्ट्री बॉडी IESA और कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इंसेंटिव समय पर मिलें और स्कीमों की मियाद बढ़ाई जाए, तो भारत की चिप मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ तेज हो सकती है।
सेमीकंडक्टर पर सरकार से क्या उम्मीदें
सेमीकंडक्टर कंपनियों और इंडस्ट्री एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि India Semiconductor Mission और Design Linked Incentive जैसी स्कीमों को Budget 2026 में आगे भी जारी रखा जाए और पहले से मंजूर प्रोजेक्ट्स के लिए फंड का आवंटन बढ़ाया जाए। सेक्टर की अपील है कि कैपिटल इंटेंसिव प्रोजेक्ट्स की वजह से इंसेंटिव का भुगतान समय पर हो, ताकि प्रोजेक्ट निर्माण और शुरुआती सालों में कैश फ्लो पर दबाव कम रहे। साथ ही मांग है कि मैन्युफैक्चरिंग पर 15 फीसदी की concessional टैक्स रेट को सेमीकंडक्टर फैब, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तक भी बढ़ाया जाए
मेड इन इंडिया और वैल्यू एडिशन पर फोकस
इंडस्ट्री चाहती है कि एक्सपोर्ट इंसेंटिव्स को सिर्फ वॉल्यूम पर नहीं, बल्कि भारत में होने वाले वैल्यू एडिशन से जोड़ा जाए, ताकि लोकल सप्लाई चेन और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग मजबूत हो सके। सुझाव यह भी है कि PLI बेनिफिट्स को इस शर्त से जोड़ा जाए कि कंपनियां ज्यादा से ज्यादा Made-in-India कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल करें, जिससे घरेलू ESDM इकोसिस्टम की गहराई बढ़े। नीति विशेषज्ञों के अनुसार Budget 2026 में R&D टैक्स क्रेडिट, स्किल डेवलपमेंट और सेमीकंडक्टर क्लस्टर डेवलपमेंट पर अतिरिक्त फोकस की भी संभावना जताई जा रही है
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2030 तक 10 लाख करोड़ रुपये का बाजार
विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत का सेमीकंडक्टर और उससे जुड़े इकोसिस्टम का बाजार 2030 तक करीब 10 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच सकता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी, क्लाउड, डेटा सेंटर और डिफेंस की मांग तेज गति से बढ़ रही है। सरकार पहले ही चिप और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग के लिए लगभग 10 अरब डॉलर (करीब 76,000 करोड़ रुपये) की इंसेंटिव स्कीम मंजूर कर चुकी है, जिसका लक्ष्य घरेलू प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट को बढ़ाना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि Budget 2026 में अगर इस आउटले में बढ़ोतरी या नई स्कीमों की घोषणा होती है तो प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और तेज हो सकता है।
किन शेयरों पर नजर रह सकती है
सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में सीधे चिप मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ केमिकल और गैस सप्लायर कंपनियों को भी बड़ा लाभ मिल सकता है, क्योंकि फैब और OSAT यूनिट्स को हाई प्यूरीटी केमिकल और स्पेशलिटी गैस की जरूरत होती है। हाल की रिपोर्ट्स में Acutaas Chemicals, Archean Chemicals और Stallion India को ऐसे प्लेयर्स के तौर पर हाइलाइट किया गया है जो सेमीकंडक्टर ग्रेड केमिकल और गैस सप्लाई से तेज रेवेन्यू ग्रोथ दिखा रहे हैं और जिनकी रिटर्न प्रोफाइल वेल्यू एडिशन बढ़ने के साथ बेहतर हुई है। मार्केट एनालिसिस बताता है कि जैसे-जैसे भारत में नए फैब, पैकेजिंग और टेस्टिंग प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ेंगे, वैसे-वैसे इन तरह की कंपनियों के ऑर्डर और कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर सीधा असर देखने को मिल सकता है।
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