हाल ही में कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने पावर सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों पर कड़े व्यू के साथ रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में Tata Power, NTPC, NHPC, JSW Energy और Power Grid जैसे स्टॉक्स पर ‘Sell’ रेटिंग को बरकरार रखा गया, जबकि CESC और Coal India पर ‘Reduce’ और ACME Solar पर ‘Buy’ रेटिंग दी गई। इस रिपोर्ट का आधार कमजोर डिमांड ग्रोथ, तेज़ी से बढ़ती कैपेसिटी और पिछले दो सालों में उम्मीद से कम कमाई को माना गया है।
किन लेवल पर गिरावट की गुंजाइश बताई गई
कोटक ने इन यूटिलिटी शेयरों के लिए नए फेयर वैल्यू टार्गेट भी दिए हैं, जो मौजूदा बाज़ार भाव से नीचे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक Tata Power का फेयर वैल्यू 320 रुपये, Power Grid का 260 रुपये, NTPC का 325 रुपये, NHPC का 75 रुपये और JSW Energy का 495 रुपये रखा गया है। इसके अलावा CESC के लिए 165 रुपये, Coal India के लिए 370 रुपये और ACME Solar के लिए 350 रुपये का वैल्यूएशन सुझाया गया है। इन लेवल्स से ऊपर ट्रेड होने की स्थिति में ब्रोकरेज गिरावट की संभावना मान रहा है।
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कैपेसिटी ऐडिशन
रिपोर्ट के अनुसार NTPC, NHPC और Tata Power अपनी FY26 की कैपेसिटी ऐडिशन टार्गेट से H1FY26 में पीछे चल रहे हैं। वहीं JSW Energy और ACME Solar अधिग्रहण और कम टार्गेट की वजह से ट्रैक पर माने जा रहे हैं। ब्रोकरेज का मानना है कि प्रोजेक्ट execution में देरी से पिछले दो वर्षों में इन कंपनियों की earnings ग्रोथ उम्मीद से काफी कम रही और वैल्यूएशन मल्टीपल्स का de-rating हुआ है।
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डिमांड कम, सप्लाई तेज – सेक्टर सेंटिमेंट दबाव में
पावर डिमांड की बात करें तो FY2026 की अब तक की अवधि में देश की बिजली मांग सिर्फ 1 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ी है, जबकि FY2025 में भी बेस ग्रोथ करीब 3 प्रतिशत ही रही थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबा खिंचा मॉनसून और कृषि मांग में कमजोरी (जो कुल पावर खपत का लगभग 17 प्रतिशत है) डिमांड पर दबाव डाल रही है। दूसरी ओर पिछले सात महीनों में कुल पावर कैपेसिटी लगभग 37 GW बढ़ी है, जो FY2025 में जुड़े 33 GW से अधिक है और इसमें बड़ी हिस्सेदारी रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स की है।
वैल्यूएशन, earnings
कोटक के मुताबिक मौजूदा करेक्शन के बाद इन यूटिलिटी स्टॉक्स के वैल्यूएशन कुछ हद तक आकर्षक दिखते हैं लेकिन अभी भी ‘आराम से एंट्री’ वाला स्तर नहीं माने जा रहे। रिपोर्ट में कहा गया है कि moderated demand, आक्रामक कैपेसिटी ऐडिशन और प्रोजेक्ट अवॉर्ड्स में अनिश्चितता के कारण earnings ग्रोथ पर रिस्क बना हुआ है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि H1FY26 में ज़्यादातर कंपनियों की earnings लो सिंगल डिजिट ग्रोथ पर रही हैं, जो पूरे साल के टार्गेट से काफी कम है और निकट अवधि में शेयर प्राइस पर दबाव बनाए रख सकती हैं।
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